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an overview menstrual cycle

पीरियड्स या मासिक धर्म स्त्रियों को हर महीने योनि से होने वाला लाल रंग के स्राव को कहते है। पीरियड्स के विषय में लड़कियों को पूरी जानकारी नहीं होने पर उन्हें बहुत दुविधा का सामना करना पड़ता है। पहली बार पीरियड्स होने पर जानकारी के अभाव में लड़कियां बहुत डर जाती है। उन्हें बहुत शर्म महसूस होती है और अपराध बोध से ग्रस्त हो जाती है।

पीरियड्स मासिक धर्म को एक सामान्य शारीरिक गतिविधि ही समझना चाहिए जैसे उबासी आती है या छींक आती है। भूख, प्यास लगती है या सू-सू पोटी आती है।

मासिक चक्र के समय शरीर में परिवर्तन 

1. हार्मोन्स में परिवर्तन
मासिक चक्र के शुरू के दिनों में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन बढ़ना शरू होता है। ये हार्मोन शरीर को स्वस्थ रखता है विशेषकर ये हड्डियों को मजबूत बनाता है। साथ ही इस हार्मोन के कारण गर्भाशय की अंदरूनी दीवार पर रक्त और टिशूज़ की एक मखमली परत बनती है ताकि वहाँ भ्रूण पोषण पाकर तेजी से विकसित हो सके। ये परत रक्त और टिशू से बनी होती है।
2. ओव्यूलेशन 
संतान उत्पन्न होने के क्रम में किसी एक ओवरी में से एक विकसित अंडा डिंब निकल कर फेलोपीयन ट्यूब में पहुँचता है। इसे ओव्यूलेशन कहते है। आमतौर पर ये मासिक चक्र के 14 वें दिन होता है । कुछ कारणों से थोड़ा आगे पीछे हो सकता है।
ओव्यूलेशन के समय कुछ हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन आदि अधिकतम स्तर पर पहुँच जाते है। इसकी वजह से जननांगों के आस पास ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। योनि के स्राव में परिवर्तन हो जाता है। जिसके कारण महिलाओं की सेक्सुअल डिजायर बढ़ जाती हैं। इसलिए इस ड्यूरेशन में सेक्स करने पर प्रेग्नेंट होने के चन्वेस बढ़ जाते हैं।
3. अंडा 
फेलोपियन ट्यूब में अगर अंडा शुक्राणु द्वारा निषेचित हो जाता है तो भ्रूण का विकास क्रम शुरू हो जाता है। अदरवाइज 12 घंटे बाद अंडा खराब हो जाता है। अंडे के खराब होने पर एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है। गर्भाशय की ब्लड व टिशू की परत की जरुरत ख़त्म हो जाती है। और ऐसे में यही परत नष्ट होकर योनि मार्ग से बाहर निकल जाती है। इसे ही पीरियड्स, मेंस्ट्रुल साइकिल, महीना आना या रजोधर्म भी कहा जाता है। और इस दौर से गुजऱने वाली स्त्री को रजस्वला कहा जाता है।
4. ब्लीडिंग
पीरियड्स के समय अक्सर यह मन में यह मन में यह सवाल आता है की ब्लीडिंग कितने दिन तक होना चाहिए और कितनी मात्रा में होना चाहिए कि जिसे सामान्य मानें। पीरियड यानि MC के समय निकलने वाला स्राव सिर्फ रक्त नहीं होता है। इसमें नष्ट हो चुके टिशू भी होते है। अतः ये सोचकर की इतना सारा रक्त शरीर से निकल गया, फिक्र नहीं करनी चाहिए। इसमें ब्लड की क्वांटिटी करीब 50 ml ही होती है। नैचुरली पीरियड्स तीन से छः दिन तक होता है। तथा स्राव की मात्रा भी अलग अलग हो सकती है। यदि स्राव इससे ज्यादा दिन तक चले तो डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।