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bronchitis

ब्रौनकियल नलियाँ, या ब्रौन्काई, श्वास की नली को फेफड़ों के साथ जोड़ती हैं । ब्रौनकियल नलियाँ जब ज्वलनशील या संक्रमित हो जाती हैं, तो उस अवस्था को ब्रौनकाईटिस कहते हैं। ब्रां‍काइटिस फेफड़ों में बहती हुई हवा और ऑक्सीजन के प्रवाह को कम कर देती है, जिससे वायु मार्ग में प्रचंड रूप से कफ़ और बलगम का निर्माण होता है।

लक्षण

मुख्य लक्षण प्रातः काल साफ, पीला रंग लिए हरे रंग के लार के साथ तेज खांसी का होना है। एक्यूट और क्रोनिक दोनों तरह के ब्रोंकाइटिस के लिए लक्षणों में

  • ब्रांकाई की सूजन
  • साँस लेने में कठिनाई
  • व्हीज़िंग (सांस के साथ सीटी की आवाज होना)
  • छाती में दर्द
  • बुखार और कंपकंपी
  • छाती में जकड़न या बेचैनी
  • नाक का भरना या बहना
  • सिरदर्द
  • थकान
  • मांसपेशियों में दर्द
  • गले में खराश

कारण

  • तम्बाकू के धुएं की चपेट में आना
  • वायरस
  • बैक्टीरिया
  • प्रदूषक या साल्वेंट की चपेट
  • वायु प्रदूषण
  • धूल
  • विषैली गैसें
  • औद्योगिक धुआं
  • रसायन

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार

  • तरल पदार्थ, हर्बल टी, और सूप अधिक मात्रा में पीयें।
  • बगैर मीठा किया नीबू पानी ब्रोंकाइटिस के इलाज के लिए लाभकारी होता है।
  • ब्रोंकाइटिस पीड़ितों के लिए स्ट्रॉबेरी बहुत अच्छी होती हैं।
  • फैटी एसिड्स का सेवन बढ़ा दीजिये क्योंकि यह ब्रोंकाइटिस से उत्पन्न हुई सूजन को कम करने में सहायक होता है। अखरोट और ठन्डे पानी की मछली फैटी एसिड से भरपूर होते हैं।
  • पानी का अधिक मात्रा में सेवन शरीर में इकट्ठा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।
  • रसीले फल जैसे कि अंगूर, संतरे, सेब और स्ट्रॉबेरी।
  • सभी तरह की बेरीज, ब्रोकोली, पालक, और गाजर एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं।
  • प्याज पुराने समय से चली आ रही दवा है और इसमें सूजन कम करने का गुण होता है, इसलिए इसका सेवन करते रहना चाहिए।
  • लहसुन और अदरक को स्वाद और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए सम्मिलित करें।
  • बलगम की मात्रा घटाने के लिए जौ का गर्म सूप पीयें

इनसे परहेज करें

  • गोश्त, शक्कर, चाय, कॉफ़ी, मसाले, अचार, रिफाइंड और प्रोसेस्ड आहार, शीतल पेय, शक्कर की गोलियां, आइसक्रीम और शक्कर व मैदे से बने पदार्थ के सेवन से बचना चाहिए।
  • कार्बोहायड्रेट से समृद्ध आहार अपच और पेट फूलने का कारण हो सकते हैं और इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • केले बलगम को बढ़ाते हैं, इसलिए उनके सेवन से बचना चाहिए।

घरेलू उपाय (उपचार)

  • संक्रमण शांत होने तक आराम करें।
  • धूम्रपान ना करें और धुएं के संपर्क से भी बचें क्योंकि धूम्रपान ब्रोन्कियल नलिकाओं को उत्तेजित करके उनकी प्रतिरोधक क्षमता घटाता है।
  • वायरस और अन्य संक्रमण फैलने से रोकने के लिए अपने हाथों को नियमित धोएं।
  • ह्यूमिडिफायर (नमी बढ़ाने वाला यन्त्र ) का प्रयोग करें।
  • तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें।