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बचपन की भूल – जवानी का खून

ईश्वर ने पुरूष को शक्तिशाली इंसान बनाकर इस संसार में इसलिए भेजा है कि वह नारी सौन्दर्य के समिश्रण से नई पौध लगाकर कुदरत का सौंपा काम पूरा कर सके दिन भर में इंसान को जो कष्ट और परेशानियां मिलती हैं वह उन सबको रात की विश्राम बेला में रति सुख के साथ भूलकर हर नई सुबह फिर से ताजा और चुस्त होकर अपना कार्य प्रारम्भ कर सके। उचित परामर्श एवं सलाह लिए बिना शादी परेशानी का कारण बन सकती है। हमारे पास रोज बहुत से पर्सनल लैटर आते हैं जिनमें बहुत से पुरुष अपनी कमजोरी एवं विवाहित जीवन की परेशानी के कारण आत्महत्या करने का जिक्र करते है। लेकिन जो आत्महत्या नहीं करते वे घर से भाग जाते हैं और उनकी पत्नियां लाज शर्म छोड़कर पराए पुरुषों का सहारा लेने पर मजबूर हो जाती हैं। यह सब इसलिए होता है कि समय पर उन्हें सही मार्ग दर्शन नहीं मिलता । स्कूलों में उन्हें यह बात तो बताई जाती है कि गन्दे नाखूनों को मुंह से नहीं काटना चाहिए क्योंकि गन्दे नाखूनों के जरिए गन्दी पेट में जाकर बीमारियां पैदा करती है लेकिन यह कोई नहीं समझता कि गन्दे विचारों से मनुष्य का शारीरिक व मानसिक रूप से कितना बड़ा नुकसान होता है जिसके कितने भयंकर परिणाम निकलते हैं। फलस्वरूप नतीजा यह होता है कि जिस अंग से मनुष्य को सबसे अधिक सुख मिलना निश्चित है उसी अंग को कच्ची अवस्था में तकिए या हाथ की रगड़ से विकृत कर दिया जाता है उसको इन्हीं साधनों द्वारा कष्ट करके अपने जीवन को मझधार में छोड़ दिया जाता है।

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