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childlessness problems in female

बाँझपन जिसे कई लोग बन्ध्यापन तथा अनुर्वरता के नाम से भी जानते हैं | किसी भी युवक और युवती के लिए बाँझपन किसी अभिश्राप से कम नहीं होता | अमुमन हमारे समाज में बाँझपन की समस्या को महिलाओ से जोड़कर देखा जाता रहा हैं लेकिन यह अवधारणा बिल्कुल ही गलत हैं क्यूंकि एक बच्चे को जन्म देने में जितनी अहम भूमिका स्त्री की होती हैं उतनी ही सामान भागिदारी पुरुष की भी होती हैं | इसलिए बाँझपन के लिए सिर्फ स्त्री को जिम्मेवार ठहराना बिल्कुल ही गलत हैं |

बाँझपन की समस्या दो प्रकार की होतीं हैं – प्राकृतिक और अप्राकृतिक, अगर किसी महिला या पुरुष में बाँझपन की समस्या बचपन से यानि कुदरती है तो उस समस्या को प्राकृतिक बाँझपन समझा जाता हैं | इनफर्टिलिटी मुख्यतय दो तरह से होती है। पहली जन्मजात जिसे ‘बन्ध्या‘ बांझपन से जाना जाता है। और दूसरी ‘मृतवत्सा वन्ध्या‘ से जाना जाता है, जिसमें पहला बच्चा होने पर दूसरा बच्चा नही होता। परन्तु आईवीएफ एवं कृत्रिम गर्भाधान उपचार के माध्यम से दोनो तरह के इनफर्टिलिटी का उपचार सम्भव है।

इंफर्टिलिटी के लक्षण

  • सेक्स इच्छा में कमी हो जाती है। ऐसी महिलाएं सेक्स से दूर भागने लगती हैं।
  • संभोग के दौरान जल्दी डिस्चार्ज हो जाना या फिर फोरप्ले के लिए बहुत देर से तैयार होना।
  • अनियमित माहवारी होना या फिर महीने में दो-दो बार महावारी होना।
  • हर समय उदासी रहना या मानसिक तनाव रहना।
  • आत्ममविश्वास में कमी होना।
  • गर्भधारण के प्रयासों के दौरान गर्भधारण होने के बजाय हाईडाटिडेफामोल( हाइपरमोल) होना।
  • सामान्य से कम वजन होना।

इंफर्टिलिटी की चपेट में आने के कारण

  • कई बार कुछ महिलाएं लंबे समय से किसी बीमारी के कारण भी इंफर्टिलिटी का शिकार हो सकती हैं।
  • किसी एंटीबायोटिक का लंबे समय से सेवन करने या सेक्स लाइफ पर दवाओं के साइड इफेक्ट का होना।
  • किसी महामारी या लंबी बीमारी होने या फिर शारीरिक कमजोरी के कारण इंफर्टिलिटी का शिकार होना।
  • हार्मोंस के बीच असंतुलन या कुपोषण के कारण हार्मोंस में कमी होना।
  • एक बार गर्भपात हो चुका हो या फिर गर्भधारण करने की क्षमता ना होना।
  • गर्भधारण के दौरान कोई अंदरूनी चोट पहुंचना या फिर जानबूझकर गर्भपात करवाने से होने वाले साइड इफेक्ट।
  • ऑपरेशन के दौरान पहले बच्चे के होने से भी कई बार महिलाएं दोबारा गर्भधारण करने में सक्षम नहीं हो पाती।
  • धूम्रपान और एल्कोहल का बहुत अधिक सेवन करना।
  • अत्यधिक वजन से भी महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।

स्त्रियों में बाँझपन के लक्षण

★ 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना.
★ पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना.
★ पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं.
★ मासिकचक्र में पीरियड्स न आना.
★ पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना.
★ मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना.
★ त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है.
★ सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना.
★ होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास.
★ बालों का झड़ना या पतला होना.
★ वजन बढ़ना.
★ निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है.
★ सैक्स के दौरान दर्द होना.