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अकेलापन महसूस करते हैं तो हो सकती है दिल की बीमारी

क्या आप जानते हैं कि अकेलापन आप की जान के साथ खिलवाड़ कर सकता है। रिसर्च में सामने आया है कि लंबे समय तक अकेलापन और सामाजिक रूप से अलग-थलग रहने से दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। देखा जाये तो व्यक्ति का अपने दोस्तों व परिवार के साथ रहना उनके साथ समय बिताना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि हम अपने दिल की बात दोस्तों या परिवार के साथ शेयर करते है तो हमारा दिल हल्का रहता है और दिल को संतुष्टि भी मिलती है। अकेलापन कुछ दिनों तक सही हो सकता है लेकिन लम्बें समय तक अकेला रहना दिल से जुड़ी समस्याओं को पैदा कर सकता है। जो हमारे लिये एक बहुत ही चिन्ता का विषय है।

अगर आप भी अकेलेपन का शिकार है तो सावधान हो जाइए। अपने अकेले रहने की आदत को दूर भगाइए। हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि अकेलेपन के शिकार लोगों को हार्टअटैक की संभावना बड़ जाती है। ऐसे लोगों में दिल की बीमारी का खतरा 29 फीसदी और स्ट्रोक का खतरा 32 फीसदी तक बढ़ जाता है। हर मनुष्य के जीवन में कभी न कभी एक वक्त ऐसा भी आता है जब वह खुद को बिल्कुल अकेला महसूस करने लगता है। उनके मन में ये विचार घर कर जाता है कि हमारे लिए इस पूरी दुनिया में कोई हमारा अपना है ही नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं लंबे समय तक सामाजिक रूप से अलग-थलग रहने से दिल से जुड़ी जानलेवा बीमारियों के होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अकेलापन स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है।

हाल ही में हुये एक सर्वे के अनुसार यह बात सामने आई है कि जो लोग अपने दोस्तों व परिवारों से दूर एकांत में रहते हैं अक्सर वही लोग दिल की बीमारियों से परेशान रहते हैं। अकेलापन महसूस करना पुरुषों और महिलाओं दोनों की तुलना में दिल की गंभीर समस्याओं से खराब परिणामों में से मौजूद हैं। आज अकेले की तुलना में अकेलापन बहुत अधिक आम शब्द है और पूर्ण रूप से अधिकतर लोग अकेले रहते हैं। पिछले रिसर्च से यह पता चला है कि अकेलापन और सामाजिक अलगाव हृदय रोग और स्ट्रोक से जुड़ा हुआ है, लेकिन विभिन्न प्रकार के कार्डियोवैस्कुलर बीमारी वाले रोगियों में इसकी जांच सामने नही आई है।

आमतौर पर देखा जाता है कि जीवनसाथी के खोने की पीड़ा अक्सर हर किसी को अन्दर तक आघात कर डालती है और लोगों की नींद तक छीन जाती है। ऐसे लोगों को दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि पार्टनर के बिछड़ने से लोगों की शारीरिक पीड़ा असहनिय हो जाती है। शारीरिक पीड़ा और उत्तेजना अधिक होने पर उनको दिल का दौरा पड़ने का खतरा बना रहता है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि हाल ही में हुई एक रिसर्च इस बात का खुलासा करती है कि नींद में बाधा और शारीरिक पीड़ा जीवनसाथी से वंचित लोगों में दो से तीन गुनी ज्यादा होती है। जीवनसाथी से बिछड़े लोगों को अक्सर नींद में खलल की शिकायत रहती है जिसके कारण वे अनिद्रा रोग का शिकार हो जाते हैं। समय के साथ साथ वह अपने को अकेला महसूस करने लगते हैं और इसी वजह से वह दिल की बीमारी के शिकार हो जाते हैं।

सच तो यह है कि जब व्यक्ति बिल्कुल अकेला पड़ जाता है तो वह टूट सा जाता है और ज्यादा सोचने पर मजबूर हो जाता है। बेवजह सोचने और चिंता करने से अवसाद यानि डिप्रेशन की स्थिति पैदा हो जाती है और अवसाद दिल के लिए घातक साबित होता है। आज के इस दौर में शहरों के साथ-साथ कुछ कस्बों तक में आधुनिक जीवनशैली और बदलते मूल्यों के कारण ज्यादातर लोग अकेले रहने को विवश हैं। इसी अकेलेपन की विवशता के कारण हमारे जीवन पर बहुत विपरित असर पड़ता है। यहां तक की इन सबका असर जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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