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अभ्रक

अभ्रक (Mica) एक खनिज है जो आग्नेय (Igneous rock) एवं कायांतरित चट्टानों (metamorphic rock) में परत के रूप में पाया जाता हैं। यह रंगरहित या हलके पीले, हरे या काले रंग का होता है। रासायनिक रूप से यह एक जटिल सिलिकेट यौगिक है, जिस पर अम्लों(acids) का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

पूरी दुनिया का जरूरत का 80% अभ्रक भारत में ही मिलता है (largest producer of mica in world) अभ्रक उत्पादन में प्रथम तीन देशों के नाम इस ट्रिक (gk tricks) की मदद से याद रख सकते हैं:

भारत में अभ्रक उत्पाद

इस खनिज के उत्पादन में आन्ध्रप्रदेश और राजस्थान प्रमुख राज्य (सर्वाधिक अभ्रक उत्पादक राज्य) है।

बिहार की यह पश्चिम में गया जिले से हजारीबाग तथा मुंगेर होती हुई पूरब में भागलपुर जिले तक लगभग ९० मील की लंबाई और १२-१६ मील की चौड़ाई में फैली हुई है। इसका सर्वाधिक उत्पादक क्षेत्र कोडर्मा तथा आसपास के क्षेत्रों में सीमित है। बिहार में सबसे अच्छे प्रकार का लाल (रूबी) अभ्रक पाया जाता है जिसके लिए यह प्रदेश संपूर्ण संसार में प्रसिद्ध है।

आंध्र प्रदेश जो कि सर्वाधिक अभ्रक उत्पादक राज्य (mica producing states in india) में से है, के नेल्लोर जिले की पेटिका दूर तथा संगम के मध्य स्थित है।

भारतीय अभ्रक के उत्पादन में राजस्थान का द्वितीय स्थान है। राजस्थान की अभ्रक पेटिका जयपुर से उदयपुर तक फैली है तथा उसमें पिगमेटाइट मिलते हैं।

उपयोग:

इसकी पतली-पतली परतों में भी विद्युत्‌ रोकने की क्षमता होती है (विद्युत्‌ का कुचालक) और जिसके कारण इसका उपयोग अनेक बिजली के उपकरणों जैसे कंडेंसर, कम्यूटेटर, टेलीफोन, डायनेमो आदि में होता है।

पारदर्शक तथा तापरोधक (ऊष्मा का कुचालक) होने के कारण यह लैंप की चिमनी, स्टोव, भट्ठियों आदि में प्रयुक्त होता है।

इस के छोटे-छोटे टुकड़े रबड़ उद्योग में, रंग बनाने में, मशीनों में चिकनाई देने के लिए तथा मानपत्रों आदि की सजावट के काम आते हैं।

आयुर्वेद चिकित्सा में इसके भस्म काफी प्रचलित औषधि है जो क्षय, प्रमेह, पथरी आदि रोगों के निदान में प्रयुक्त होती है।