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what is hyperthyroidism

थाइराइड की स्थिति में जब थाइराइड हार्मोन अधिक बनता है तो उस स्थिति को हाइपर-थाइरॉइडिस्म कहा जाता है। हाइपर-थाइरॉइडिस्म में यह ग्रंथि ज्यादा प्रभावी होती है और थाइराइड हार्मोन (थाइरॉक्सिन) ज्यादा पैदा करती है।

थाइराइड ग्रंथि से थाइराइड हार्मोन पैदा होता है। यह ग्रंथी शरीर की हर कोशिका, अंग और ऊतक पर प्रभाव डालती है। साथ ही साथ, यह शरीर का तापमान, शरीर का वजन, हार्ट रेट, पाचन क्रिया, ऊर्जा सबको नियंत्रित करती है। हालांकि यह बहुत छोटा अंग है लेकिन यह हमारी तंदुरुस्ती के लिए महत्वपूर्ण है। थाइराइड की स्थिति में जब थाइराइड हार्मोन अधिक बनता है तो उस स्थिति को हाइपर-थाइरॉइडिस्म कहा जाता है। हाइपर-थाइरॉइडिस्म में यह ग्रंथि ज्यादा प्रभावी होती है और थाइराइड हार्मोन (थाइरॉक्सिन) ज्यादा पैदा करती है। हाइपर-थाइरॉइडिस्म में कुछ आहारों का परहेज करना जरूरी होता है। आइये जानते हैं कौन से हैं वो आहार जो स्थिति में आपको नहीं खाने चाहिए।

अधिक शुगर वाले आहार

हाइपर-थाइरॉइडिस्म से ग्रस्त लोगों को गन्ना, डेक्सट्रोस, हाई फ्रूटस कॉर्न सिरप आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनमें मौजूद कैलोरी और शुगर से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, हाइपर थाइरॉइड वालों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। सॉफ्ट ड्रिंक, पैन केक, जैम/जैली, कुकीज़, केक, पेस्ट्रीज, कैंडीज, फाइट फ्री जमा हुआ दही आदि का सेवन ना करें।

अधिक नमक वाले आहार

नमक से थाइराइड ग्रंथि ज्यादा प्रभावित होती है इसलिए हाइपर-थाइराइड से ग्रसित लोगों को ज्यादा नमक का खाना नजरअंदाज करना चाहिए। समुद्री शैवाल, कैल्प और कोई सी-फूड ना लें जिसमें आयोडीन ज्यादा होता है। हाइपर-थाइरॉइडिस्म वालों को ये बिल्कुल सेवन नहीं करने चाहियें।

शुद्ध दूध

हाइपर- थाइरॉइडिस्म में शुद्ध दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। इसका उपभोग सही नहीं है। इसलिए इसे नजर अंदाज करना चाहिए। मलाई या क्रीम निकाला हुआ दूध लें जो कि पचाने में आसान और स्वास्थ्यकर होता है।

कैफीन

इसे भी नजरअंदाज करना चाहिए। इनसे थाइरॉक्सिन ज्यादा पैदा होता है। यदि आप पहले से ही हाइपर थाइरॉइडिस्म से पीड़ित हैं तो आपको कॉफ़ी, शुगर और अन्य उत्तेजक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके बजाय आप पानी और फ्रूट जूस ले सकते हैं।

होल व्हीट

इस आटे में पोषक तत्व कम होते हैं जिससे यह पूर्ण अनाज की बजाय पचाने में आसान नहीं है। यह हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला खाद्य है जो कि रक्त में शुगर और हार्मोन के लेवल को बिगाड़ सकता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स इंडेक्स वाले खाद्य रक्त में थाइराइड जैसे हार्मोन्स का संतुलन बनाये रखते हैं। पास्ता, ब्रेड, स्नैक्स, केरलस आदि का सेवन नहीं करें। होल ग्रेन्स जैसे ब्राउन राइस, बेरली, क्युओना, एयर पोप्ड पॉप कॉर्न, होल वीट ब्रेड आदि ले सकते हैं।

रेड मीट

रेड मीट में कोलेस्ट्रॉल और संतृप्त वसा की अधिकता होती है इसलिए हाइपर-थाइरॉइडिस्म में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इससे दिल की बीमारियाँ और टाइप 2 डाइबिटीज़ का खतरा रहता है। इसकी मात्रा कम करने से हाइपर-थाइरॉइडिस्म के लक्षण भी कम होते हैं।

एलेर्जिक फूड ना खाएं

हाइपर-थाइरॉइडिस्म के कारण कई नाजुक बीमारियाँ होती हैं। यह ऑटो-इम्यून डिजीज हैं और खाने से होने वाली एलर्जी से इस प्रकार की बीमारियों के लक्षण बढ़ सकते हैं। इसलिए इस तरह के खाने से परहेज करें जिससे आपको एलर्जी है। ऐसे पदार्थों का पता करें जिनसे आपको एलर्जी होती है और इनको नजरंदाज करें। साधारण तौर पर एलर्जी लैक्टोज सहन नहीं होना (दूध), लस सहन नहीं होना (रोटी में मौजूद होता है), मूंगफली एलर्जी, गेहूं एलर्जी आदि हैं, एलर्जिक रिएक्शन उस भोजन पर ज्यादा आश्रित होने से होता है।

डेयरी उत्पाद

हाइपर-थाइरॉइडिस्म वालों को इनसे भी बचना चाहिए। अलग-अलग खाद्यों का लोगों पर अलग-अलग प्रभाव होता है। कुछ लोगों में इनसे लैक्टोज सहन नहीं होना और दूध जैसे उत्पाद पचाने में समस्या होती है। यदि आपको दूध उत्पाद जैसे मक्खन, आइसक्रीम, दही आदि से अपच, सूजन, थकान आदि होती है तो इनसे परहेज करें।