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lichen planus

लाइकेन प्लैनस एक ऐसी दीर्घ कालिक जलनशील स्थिति है जो त्वचा, मुँह और जननांगों को प्रभावित करती है। इसकी पहचान त्वचा पर गहरे, उभरेहुए, चपटे सिरों वाले घावों से होतीहै। लाइकेन प्लैनस न तो संक्रामक और न ही छूने से फैलने वालारोग है। दीर्घकालिक होने के अलावा, यह बीमारी कई बार कुछ समय के लिए घट जाती है (जब लक्षण पूरी तरह ग़ायब हो जाते हैं या उनकी तीव्रता कम हो जाती है) और फिर से उभर कर आती है (जब बीमारी के लक्षण बहुत ज़्यादा बढ़ जाते हैं)। इस वजह से कई बार परंपरागत इलाज में मरीज़ का अनुपालन अच्छा नहीं होता है।

लाइकेन प्लैनस के प्रकार

  • हाइपरट्रोफिक लाइकेन प्लैनस —लाइकेन प्लैनस के घाव मोटे हो जाते हैं और आमतौर पर हाथ-पाँव पर और ख़ासकर पिंडली पर दिखाई देते हैं। इन में बहुत खुजलाहट होती है;
  • fफ़ॉलिकुलर लाइकेन प्लैनस (या लाइकेन प्लेनोपिलेरिस) — इसमें बालों के फॉलिकल्स प्रभावित होते हैं जहां बाद में दाग भी नज़र आते हैं। प्रभावित क्षेत्र के बाल झड़ने लगते हैं;
  • लाइकेन प्लैनस एक्टिनिकस (एक्टिनिक लाइकेन प्लैनस) — मध्य-पूर्वदेशोंऔरभारतमेंगर्मियों के मौसम में यहबीमारीबहुतआमहै।चेहरे के बाहरी भागों, हाथकापिछलेहिस्से, बाँहोंऔरगर्दनकेपीछेकेभागपरपीलीकिनारियोंकेसाथगहरेघावबन जातेहैं;
  • लाइकेनप्लैनसपिग्मेंटोसस —भारतमेंइसकाएकऔरआमप्रकारदिखताहै, जिसमेंसूरजकेसंपर्कमेंआनेवालेहिस्सोंमेंऔर त्वचा के मुड़ने वाले भागों में गहरे-भूरेरंग के चकत्तेबनजातेहैंऔरयहशरीरकेऊपरीहिस्सेमेंफैलने लगते हैं;
  • एन्युलरलाइकेनप्लैनस — यहमुख्यरूपसेपुरुषजननांगोंमेंहोताहै, लेकिनत्वचाकेमुड़ने वाले भागों जैसेकाँखऔरपेटतथाजाँघकेबीचकेभागकेमोड़परहोताहै, इसमें दाद-खाजकेछोटे-छोटेगोलाकारचकत्तेदिखाई देतेहैं;और
  • लीनियरलाइकेनप्लैनस — यहघावसीधीरेखामेंहाथ-पाँवतकफैलजाताहै।इसकीवजहसेकाफ़ी परेशानी याखुजलीभीहोसकतीहै (केबनर्स फिनोमेना)।

लाइकेन प्लैनस – लक्षण

  • चपटी-सतह वाली फुंसियों की पंक्तियां या छोटे चकत्ते निकलते हैं जो सामान्यतः कुछ मिलिमीटर के घेरे में फैलेहोते हैं;
  • अधिकांश मामलों में चकत्ते बैंगनी रंगकेहोतेहैं; येबैंगनी से लेकर गुलाबी या लाल रंग के होसकते हैं;
  • खुजली जो कम या अधिक हो सकती है;
  • मामूली चोट के आस-पास कुछ नई फुंसियां देखी जा सकती हैं जैसे कि ऊपरी खरोंच (जिसे केबनर्स फिनोमेनाकहतेहैं);
  • कुछमामलोंमें, मोटे, लाल-भूरेरंगके घाव निकल सकते हैं जो परतोंमेंढंके होते हैं (इसेहाइपरट्रॉफ़िकलाइकेनप्लैनसकहतेहैं);
  • चकत्तेसूखजाने पर उस स्थान पर गहरेभूरेयाधूसर रंगकेनिशान (हाइपरपिगमेंटेशनमार्क्स) रहजातेहैं;
  • यदि यह खोपड़ी में होता है तो प्रभावित क्षेत्र के आस-पास दाग बन जाता है और प्रभावित स्थानों के बाल झड़ने लगते हैं;और
  • नाख़ूनों पर इसका असरहोने पर नाख़ूनों पर छेद और लकीर जैसे निशान नज़र आतेहैं।