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Many Youths Have Mental Problem

आजकल की युवा पीढ़ी हर छोटी चीज का तनाव ले लेते हैं जिसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है और वह इससे संबंधित कई समस्याओं से ग्रसित होने लगते हैं। मानसिक समस्याओं से ग्रसित होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

समय के साथ लोगों के लाइफस्टाइल में भी बदलाव आने लगे हैं। आज की युवा पीढ़ी को पहले की पीढ़ी से ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आजकल युवा पीढ़ी के तनाव,डिप्रेशन और अन्य मानसिक समस्याओं से ग्रसित होने की खबर आती रहती है। एक रिसर्च के अनुसार भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। जिसमें ज्यादातर युवा पीढ़ी है। यह सवाल सभी के दिमाग में आता है कि युवाओं में मानसिक समस्याओं की परेशानी क्यों बढ़ती जा रही है। तो आइए आपको बताते हैं कि क्यों युवा पीढ़ी मानसिक समस्याओं से ज्यादा ग्रसित हो रही है।

सोशल मीडिया: सोशल मीडिया कई मानसिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार होता है। सोशल मीडिया की वजह से लोगों में असंतुष्टि की भावना बढ़ती जाती है। जिसकी वजह से किसी काम को करने में दिक्कत आने लगती हैं और आऐप उस काम को टालने लगते हैं। आज के युवाओं को सोशल मीडिया की इसतनी आदत लग गई है कि इसके बिना कोई काम नहीं कर पाते हैं। जिसकी लत उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

पढ़ाई, नौकरी और करियर का तनाव: आजकल कॉम्पिटिशन इतना बढ़ गया है कि हर कोई हमेशा आगे रहना चाहता है। फिर चाहे वो पढ़ाई हो या नौकरी सभी को बेस्ट चाहिए होता है। जिसका परिणाम यह होता है कि बच्चों में तनाव का लेवल बढ़ जाता है। मानसिक समस्याओं की वजह से ही तनाव होता है।

आपसी समझ में कमी होना: आज के समय में लोग एक-दूसरे के बारे में सभी बाते जानते होते हैं लेकिन वह उनकी भावनाओं से के बारे में नहीं जानते होते हैं। जीवन में किसी के पास इतना समय नहीं होता है कि वह रिलेशनशिप और बांड को बेहतर बना सके। यह युवा पीढ़ी की मानसिक स्थिति को दर्शाता है।

डेस्टिनेशन एडिक्शन सिंड्रोम: डेस्टिनेशन एडिक्शन एक परिस्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी खुशी को दूसरी चीजों में ढूंढते हैं। यह आपकी नौकरी, पार्टनर और दूसरी जगहों में हो सकती है। कई युवाओं को इसकी लत लग जाती है। जिसकी वजह से वह किसी भी चीज से संतुष्ट नहीं हो पाते हैं।

संतुष्ट नहीं होना: खुश रहने के लिए संतोष होना जरुरी होता है। आज की युवा पीढ़ी संतुष्ट ना होने की वजह से जीवन खुश रहकर नहीं जी पाते हैं। महत्वाकांक्षाएं जीवन की शांति को नष्ट कर देते हैं। जिसकी वजह से युवा पीढ़ी डिप्रेशन और तनाव से ग्रसित हो जाते हैं।