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manifestations of migraine headaches

माइग्रेन सर में होने वाले सबसे तेज दर्दों में से एक है। इसकी वजह से सर और कान के पीछे के हिस्से में असहनीय दर्द का अनुभव होता है। माइग्रेन एक प्रकार का न्यूरोवेस्कुलर विकार (Neurovascular Disorder) है जिसमें सिर में रूक-रूक कर दर्द होता है। हालांकि माइग्रेन के समय मस्तिष्क की सटीक क्रियाविधि (The Exact Mechanism) की जानकारी नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है की माइग्रेन के समय दिमाग में रक्त का संचार बढ़ जाता है जिससे व्यक्ति को तेज सिरदर्द होने लगता है।

माइग्रेन का दर्द आमतौर पर सिर के एक सिरे से, या कभी-कभी बीचों बीच से या पीछे की तरफ से उठता है और इसकी प्रकृति धुकधुकी जैसी होती है जो 2 से लेकर 72 घंटों तक बना रहता है। कभी यह रह-रहकर कई हफ्तों या महीनों तक, या फिर सालों तक खास अंतराल में उठता है। कई बार एक ही समय में यह बार-बार हथौड़ों की लगातार चोट का एहसास कराता है।

आमतौर पर दो तरह के माइग्रेन अटैक होते हैं। ऑरा रहित माइग्रेन अटैक (कॉमन माइग्रेन) और दूसरा ऑरा माइग्रेन अटैक (क्लासिक माइग्रेन)। कॉमन माइग्रेन में आमतौर पर सिर के एक हिस्से में हल्का या बहुत तेज दर्द शुरू होकर पूरे सिर में दर्द फैल जाता है।

दर्द चार से 72 घंटे तक रह सकता है। क्लासिक माइग्रेन में दर्द कॉमन माइग्रेन की तरह ही होता है। फर्क बस इतना होता है कि इसमें पीड़ित व्यक्ति को वॉर्निंग साइन (ऑरा के रूप में) सिरदर्द होने से पहले ही नजर आने लगते हैं।

ऑरा यानी चमक कौंधना, काले धब्बे दिखना, चीजें घूमती या हिलती हुई नजर आना, हाथ-पैरों में झुनझुनाहट, फूड क्रेविंग, बोलने के समय कठिनाई महसूस करना जैसा प्रतीत होगा। ऐसी स्थिति में सिरदर्द शुरू होने से पहले ही दवाई के जरिए इसे रोका जा सकता है।

माइग्रेन की मुख्य वजह क्या है, इसका पता अब तक नहीं चल सका है। आमतौर पर माना जाता है कि मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में मौजूद ब्लड वेसल के सिकुड़ने के कारण पहले ऑरा और बाद में माइग्रेन की स्थिति उत्पन्न होती है। लेकिन जीवनशैली भी इसके लिए जिम्मेदार होती है।

महिलाओं में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने, पीरियड के समय या उससे पहले भी सिरदर्द हो सकता है। इसके अलावा कैफीन का अधिक उपयोग, अल्कोहल का सेवन, तनाव, बेचैनी, पर्याप्त नींद न लेना, अधिक यात्रा करना, मसालेदार भोजन करना, शारीरिक थकावट, संवेदनात्मक उत्तेजना, जैसे- तेज प्रकाश, फोटोफोबिया यानी प्रकाश से परेशान, तेज आवाज से समस्या, धूप से आंख चौंधियाना आदि माइग्रेन के कारण हैं।

माइग्रेन होने पर योग और ध्यान करें। इससे तनाव कम होगा। लेकिन, जहां भी योग करें वह जगह प्रकाश से चकाचौंध वाली, तेज धूप, तेज गंध वाली नहीं होनी चाहिए। माइग्रेन रोगियों को अच्छी नींद लेनी चाहिए।

इसके अलावा मसालेदार भोजन, जंक और डिब्बाबंद फूड, अल्कोहल, धूम्रपान का सेवन न करें। ताजे फल, प्रोटीनयुक्त डाइट जैसे दूध, दही, पनीर, दाल, मांस और मछली आदि का सेवन करें।