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self care tips for psoriasis

सोरायसिस त्वचा पर होने वाली ऑटोइम्यून बीमारी है। जिसके होने से त्वचा का कोशिका मरने लगता है और लाल एवं सफ़ेद धब्बे के रूप में शरीर में दिखने लगता है। यह रोग प्रतिराकक्षा प्रणाली के गलत संदेश के कारण कोशिकाओ की तीव्र वृद्धि दर के कारण उत्पन्न होता है। लांकि यह रोग केवल 1-2 प्रतिशत लोगों में ही पाया जाता है।

जो लोग सोराइसिस के शिकार होते हैं उन्हें दिल की बीमारी तथा मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियां होने की संभावना भी काफी ज़्यादा होती है। कुछ ख़ास भोजनों को ग्रहण करके और शरीर के लिए अनुपयुक्त भोजनों से परहेज करके आप सोराइसिस एवं सोरियाटिक आर्थराइटिस से होने वाली जलन से छुटकारा पा सकते हैं।

सोरायसिस का उपचार

आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति के अनुसार शरीर से जीव विष को निकालना प्राथमिकता है. यह पंचकर्म की पद्धति द्वारा किया जाता है. सबसे पहले रोगी को औषधीय घृत जो रोगी की प्रकृति पर निर्भर करता है, इसका सेवन 5-7 दिन तक करना होता है. इसके पश्चात वमन एवं विरेचन द्वारा आँतों को सॉफ किया जाता है. इसके औषधि युक्त लस्सी की धारा सिर पर गिराई जाती है. तत्पश्चात पूरे शरीर पर मिट्टी और औषधियों द्वारा लेप किया जाता है.

शाकाहारी भोजन का सेवन ही रोगी के लिए हितकर है. दही, काली माह की दाल, मिर्च-मसालेदार भोजन और नमक का सेवन कमतर रखना चाहिए. ठंडे, फ्रिज में रखे भोजन का सेवन रोगी को बिल्कुल भी नही करना चाहिए.

काकमाची के पत्तों के रस को हर रोज़ लगाना हितकर है. इससे त्वचा पर सूजन में कमी होती है तथा खुजली और त्वचा की परत पर आराम मिलता है.

लहसुन का सेवन आवश्य करें: लहसुन द्वारा रक्त की शुद्धि होती है. हर रोज़ सुबह खाली पेट लहसुन खाने से इस रोग में लाभ मिलता है.

चमेली के फूल: चमेली के फूलों द्वारा इस रोग में अत्यंत लाभकारी परिणाम देखने को मिलते हैं. इन फूलों को पीसकर इनका लेप ग्रस्त क्षेत्र में करना चाहिए. इससे दर्द एवं कुज़ली वाली जाल्न में आराम मिलता है.

गुग्गूल:  एक आयुर्वेदीय औषधि है जिसका गोंद अनेक प्रकार के औषधीय लाभ देता है.  इसमें जलन-रोधक और वसा-नियंत्रित करने की गुणवत्ता पाई जाती है. यह वात और कफा दोनो का शमन कर आराम प्रदान करता है.  कैषोर गुग्गूल का प्रयोग इस रोग में अत्यंत लाभदायक है.नीम तेल का उपयोग भी जलन को शांत कर अनेक संक्रामक रोगाणुयों से भी ग्रस्त क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान करता है. यह फफूंदी और रोगाणुयों को नष्ट कर देता है.

ओमेगा 3 फैटी एसिड प्राप्त करने के लिए मछली काफी बेहतरीन खाद्य पदार्थ है। ये फैटी एसिड उन मरीज़ों के लिए काफी आवश्यक हैं जिन्हें सोराइसिस की समस्या है। अपने भोजन में ठंडी मछली शामिल करना आपके लिए काफी बेहतर होगा। इसके अलावा आप अन्य प्रकार की विभिन्न मछलियाँ जैसे सालमन, ट्यूना, ट्राउट आदि भी खा सकते हैं।