• 8
  • Oct
  • 0
Author

धात् रोग क्या है? इससे आपकी लाइफ व स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है बुरा असर

यह रोग व्यक्ति के दिल-दिमाग की शक्ति को कमजोर करके शरीर को बेजान बना देता है। इस शिकायत में मल या मूत्र के समय थोड़ा-सा भी जोर लगाने पर तुरन्त इन्द्री के मुख से वीर्य की बूंद टपकने लगती है या लार निकलने लगती है। धातु रोग या धात रोग (spermatorrhea) पुरुष यौन सम्बंधित समस्या है जो आकस्मिक और अनैच्छिक वीर्यपात का कारण बनती है इस समस्या से पीड़ित व्यक्तियों में स्खलन (वीर्यपात) अक्सर यौन फिल्मों / दृश्यों / को देखने, विपरीत लिंग के व्यक्ति को छूने या बात करने के दौरान भी होता है। यह समस्या व्यक्तियों को मानसिक विकारों और यौन सम्बन्धी आदतों के कारण अधिक प्रभावित करती है। यह समस्या सेक्स की इच्छाओं में नुकसान के साथ-साथ अन्य जटिलताओं का कारण बन सकती है। अतः इस समस्या से बचने के लिए एक अच्छी मानसिकता और स्वस्थ दिनचर्या को अपनाना महत्वपूर्ण होता है। इस लेख के माध्यम से आप जानेंगे कि धात (धातु) रोग (spermatorrhea) क्या है, इसके कारण, लक्षण, उपचार क्या हैं और इसकी रोकथाम के लिए क्या-क्या घरेलू उपचार अपनाये जा सकते हैं।

धात रोग या धातु रोग क्या है

धात (धातु) रोग (spermatorrhea) पुरुषों से सम्बंधित एक यौन समस्या है, जो पीड़ित व्यक्ति में बिना किसी यौन गतिविधि के सामान्य और आकस्मिक रूप से स्खलन (वीर्यपात) का कारण बनती है। यह समस्या पीड़ित व्यक्तियों में, उनकी इच्छा के बिना आकस्मिक वीर्यपात (ejaculation) को बढ़ावा देती है। कभी-कभी नींद के दौरान वीर्यपात होता है, जिसे नाइटफॉल (nightfall) कहा जाता है। यह नाइटफॉल उन प्रेम संबंधी सपनों (erotic dreams) के कारण हो सकता है, जो सम्पूर्ण प्रक्रिया को उत्तेजित करते है। धात (धातु) रोग (Spermatorrhea) के दौरान मरीज सपने देखे बिना भी वीर्य के बहाव का अनुभव कर सकता है, या दिन के दौरान सचेत (जागरूक) रहते हुए भी इस समस्या का अनुभव कर सकता है। यह समस्या एक बीमारी नहीं है बल्कि वास्तव में एक लक्षण है; जो एक कमजोर तंत्रिका तंत्र की ओर संकेत करती है। उत्सर्जन के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए यह एक तंत्रिका विकार है। यदि कोई मरीज एक सप्ताह में दो या तीन बार धात (धातु) रोग (Spermatorrhea) का अनुभव करता है तो उसे डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। क्योंकि यह व्यक्ति में अनेक समस्याओं का कारण बन सकती है।

धात रोग के कारण-

मल या मूत्र के समय थोड़ा-सा भी जोर लगाने पर तुरन्त इन्द्री के मुख से वीर्य की बूंद टपकने या लार निकलने का कारण वीर्य काफी पतला होना होता हैं तथा इसका कारण इन्द्री की नसें कमजोर व ढीली पढ़ जननी होती हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में इन्द्री की नसों में पतले वीर्य को रोकने की शक्ति नहीं रहती और थोड़ा सा दबाव पड़ने की स्थिति में धात बहने लगती है तथा इस सबका मुख्य कारण हमारे शरीर में विटामिन्स की कमी होना, हारमोंस का बहुत अधिक प्रभावित होना तथा खान-पान की आदत का ख़राब होना, उचित मात्र में भोजन न करना और गलत विचारो का मन में रखना, हस्तमैथुन करना तथा फलों का सेवन न करना आदि कारण शामिल हैं

धात रोग के लक्षण

इस समस्या में मल या मूत्र के समय थोड़ा-सा भी जोर लगाने पर तुरन्त इन्द्री के मुख से वीर्य की बूंद टपकने लगती है या लार निकलने लगती है। इस समस्या में वीर्य किसी न किसी कारण से काफी पतला बन चुका होता हैं और इन्द्री की नसें भी कमजोर व ढीली हो जाती हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में इन्द्री की नसों में पतले वीर्य को रोकने की शक्ति नहीं रहती और थोड़ा सा दबाव पड़ने की स्थिति में धात बहने लगती है तथा व्यक्ति की कमर-शरीर व पिंडलियों में दर्द महसूस होने लगता है। उठते-बैठते चक्कर व कमजोरी की अनुभूति होती है जिससे वह अपना रोजाना का काम-काज भी पूरी चुस्ती-फुर्ती से नहीं कर पाता।

धातु (धात) रोग की जटिलताएं –

यदि धातु रोग या धात रोग (Spermatorrhea) का समय पर इलाज न किया जाये तो लगातार वीर्य रिसाव के कारण अनेक जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो निम्न हैं :

  • चलने में कठिनाई
  • लगातार पीठ दर्द
  • प्रजनन क्षमता में कमी
  • नपुंसकता (impotence)
  • कामेच्छा का नुकसान (loss of libido)

धातु दोष के लिए टिप्स :-

  1. आंवले का जूस या पाउडर के सेवन करें।
  2. किशमिश/छुआरा का सेवन करें।
  3. तनाव न रखें
  4. पोष्टिक भोजन करें
  5. मसालेदार भोजन से बचें।
  6. कब्ज़ न रहने दे। इसका सही इलाज करें। इसके लिए ताजे फल व सब्जियां, सलाद आदि खाएं। पानी अधिक पियें और जंक फूड्स न खाऐं।

इसके अतिरिक्त गंदी आदतों से बचें। शराब, मांस, कामुक साहित्य, पोर्न फिल्मों, अत्यधिक हस्थमैथुन से दूर रहें और कब्ज़ की समस्या को ठीक करें। जब आपके स्वास्थ्य का पूरा सुधार होगा, शरीर की कमजोरी दूर होगी तो मूत्राशय और पेल्विस की मांसपेशियां ठीक से काम करने लगेंगी और तब यह रोग स्वतः ठीक हो जायेगा।

Avatar
admin

Leave a Comment

You must be logged in to post a comment.