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जड़ी-बूटियों एवं भस्मों का महत्व

जड़ी-बूटियों एवं भस्मों का महत्व

यूं तो इलाज में प्रयोग होने वाली अनगिनत जड़ी-बूटियां, खनिज व भस्में हैं यदि हम सभी का वर्णन करने तो इसके लिए एक मोटी पुस्तक अलग से लिखनी पड़ जाएगी लेकिन हम यहां आपकी जानकारी के लिए कुछ चुनी हुई जड़ी बूटियों एवं भस्मों के नाम लिख रहे हैं जिनके गुण अलग-अलग हैं तथा ये सब रोगी की पूरी हालत, रोग, उम्र व मौसम के अनुसार इलाज में प्रयोग की जाती हैं।

हीरक भस्म, मुक्ता भस्म, स्वर्ण भस्म, अभ्रक भस्म, लोहा भस्म, यस्त भस्म, सि( मकरध्वज, कहरवा, पिष्टी,जाफरान, अम्बर, मुश्क, जायफल, जावित्री, वंशलोचन, अश्वगंधा, शिलाजीत, छोटी इलायची, हरड़, बहेड़ा, आँवला, गोखरू, कोंच बीज, मूसली, शतावरी, सालब मिश्री, मुलहठी, अकरकरा, सेमल की जड़, विधारा आदि अनेकों ऐसे रस-रसायन हैं जिनके प्रभाव अलग-अलग होते हैं तथा इनके सेवन से दिमागी नाडि़यों और ग्रन्थियों की शक्ति बढ़ती है,वीर्य पुष्ट होता है। दिमाग, जिगर, गुर्दा, मसाना, अण्डकोष आदि अंगों की कमजोरी दूर हो जाती है। थकावट, डर, वहम, घबराहट, क्रोध, चक्कर, बैचेनी, चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगना, टांगों, बांहों व कमर में दर्द, थोड़ा सा काम करने से सांस फूलना, भूख कम लगना, कब्ज, पेट गैस, रक्त की कमी, शीघ्रपतन,स्वप्नदोष, प्रमेह, पेशाब का बार बार आना, नपुंसकता, कमजोरी आदि सभी शिकायतें दूर हो जाती हैं इसमें ऐसी जड़ी-बूटियां व भस्में भी हैं जिनसे खाया-पिया शीघ्र ही पच जाता है शरीर को भी लगने लगता है, नया खून बनता है, जिससे चेहरे पर नई रौनक व चमक आ जाती है दिल में उत्साह और शरीर में स्फूर्ति पैदा होती है खोई हुई मर्दाना व शारीरिक ताकत वापस लौट आती है शरीर उमंगों व जवानी की बहारों में लह लहा उठता है। व्यक्ति को पूर्ण रूप से पुरूष कहलाने का अधिकार प्राप्त होता है।

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